Magh Sankashti Ganesh Chaturthi (Ganesh Jayanti) | Sakat Chauth

Magh Sankashti Ganesh Chaturthi (Ganesh Jayanti) | Sakat Chauth

Ganesh Jayanti also is known as Til Kund Chaturthi, Tila Kund Chavithi and Magh Shukla Chaturthi is a Hindu festival. It is a popular festival in Maharashtra.

The day is believed as the birthday of Lord Ganesh. The difference between Ganesh Jayanti and Ganesh Chaturthi is that later is observed in the month of August/September (Bhadrapada Hindu Month) while Ganesh Jayanti is celebrated in Maagh month which corresponds to January/February month of the Gregorian calendar. It is held on Shukla paksha Chaturthi day (fourth day of the bright fortnight of the waxing moon).

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In 2020 Ganesh Jayanti falls on 13th January (Monday).

On this day people worship Lord Ganesh, they make images of Ganesh out of turmeric, sindoor, and sometimes cow dung and worship it.

Special preparation is made of til (sesame seeds) and offered to Lord Ganesh. As til is used in the preparation of food on this day hence it is also called Til Kund Chaturthi.

People keep fast on this day and offer puja to Lord Ganesh, it is said that people keep fast on this day to enhance their name and fame for themselves.

In Maharastra it is celebrated in a grand way, devotees flock to the Moreshwar temple in Morgaon, Pune district, and Siddhivinayaka temple at Siddhatek, Ahmednagar district, Maharashtra in large numbers.

Thousand of devotees across India participate in Maaghi Ganesh Utsav and take blessings of Shree Ashtavinayak.

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Ganesh Jayanti Khatha in Hindi

सतयुग में हरिश्चन्द्र नामक सत्यवादी राजा था वे साधू-सेवी व धर्मात्मा थे . उनके राज्य में कोई भी दु:खी नही था. उन्ही के राज्य में एक ऋषि शर्मा ब्राह्मण रहते थे . उनको एक पुत्र पैदा हुआ और कुछ समय बाद ब्राह्मण की मृत्यु हो गई . ब्राह्मणी दु:खी होकर भी अपने पुत्र का पालन करने लगी और गणेश चौथ का व्रत करती थी .

एक दिन ब्राह्मणी का पुत्र गणेश जी की प्रतिमा को लेकर खेलने निकला . एक दुष्ट कुम्हार ने उस बालक को आवा में रखकर आग लगा दी , इधर जब लड़का घर नही आया तो ब्राह्मणी बहुत प्रेषण और चिन्ता करते हुए .गणेश जी से अपने पुत्र के लिए प्रार्थना करने लगी और कहने लगी- अनाथो के नाथ मेरी रक्षा करों . मैं आपकी शरण में हूँ . इस प्रकार रात्रि भर विलाप करती रही . प्रात: काल कुम्हार अपने पके हुए बर्तनों देखने के लिए आया तो देखा बालक वैसे ही हैं .आवा में जंघा तक पानी भर गया हैं .

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इस घटना से हतप्रद कुम्हार ने राजा के पास जा कर सारे वृतान्त सुनाए और बोला मुझसे अनर्थ हो गया मैंने अनर्थ किया हैं , मैं दण्ड का भागी हूँ मुझे मृत्यु दण्ड मिलना चाहिए महराज ! मैंने अपनी कन्या के विवाह के लिए बर्तनों का आवा लगाया था पर बर्तन न पके . मुझे एक टोटका जानने वाले ने बताया कि बालक की बलि देने से आवा पाक जाएगा मैं इस बालक की बलि दी पर अब आवा में जल भर रहा है और बालक खेल रहा हैं .

उसी समय ब्राह्मणी आ गई और अपने बालक को उठाकर कलेजे से लगा कर घुमने लगी राजा हरिश्चन्द्र ने उस ब्राह्मणी से पुछा ऐसा चमत्कार कैसे हो गया ? ऐसा कौन सा व्रत, तप करती हो या ऐसी कौन सी विधा जानती हो जिससे ये चमत्कार हुआ . ब्राह्मणी बोली –महाराज ! मैं कोई विधा नही जानती हूँ और नहीं कोई तप जानती हूँ मई सिर्फ संकट गणेश नामक चौथ व्रत करती हूँ . इस व्रत के प्रभाव से मेरा पुत्र कुशलपूर्वक हैं

इस व्रत के प्रभाव से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं

Ganesh Aarti

Ganesh Chaturthi – Best Wishes, Messages, Facebook Status And Greetings

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Simmi Kamboj

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